| उदय कुमार रिसर्च स्कॉलर शिक्षा संकाय, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झाँसी (उत्तर प्रदेश) |
शोध सारांश
वर्तमान युग को ‘डिजिटल युग’ के रूप में जाना जाता है, जहाँ संचार, सूचना और सेवाएँ इंटरनेट एवं तकनीकी माध्यमों पर आधारित हो चुकी हैं। इसका प्रभाव पर्यटन क्षेत्र पर भी गहराई से पड़ा है। परंपरागत पर्यटन व्यवस्थाओं के स्थान पर अब सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग जैसे डिजिटल टूल्स ने महत्वपूर्ण स्थान ग्रहण कर लिया है। यह शोध पत्र “डिजिटल युग में पर्यटनः सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग का प्रभाव” विषय पर केन्द्रित है, जिसमें जनपद झाँसी को अध्ययन क्षेत्र के रूप में चुना गया है। झाँसी एक ऐतिहासिक नगर है, जहाँ प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक आते हैं। इस शोध में यह अध्ययन किया गया है कि पर्यटक अपने पर्यटन निर्णयों में सोशल मीडिया से किस हद तक प्रभावित होते हैं तथा वे किस प्रकार ऑनलाइन बुकिंग सेवाओं का उपयोग करते हैं। शोध कार्य के लिए प्राथमिक स्रोतों (जैसे सर्वेक्षण और साक्षात्कार) तथा द्वितीयक स्रोतों (जैसे वेबसाइट्स, रिपोर्ट्स और पूर्ववर्ती शोध) का उपयोग किया गया। अध्ययन में यह पाया गया कि अधिकांश पर्यटक यात्रा से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध जानकारी को देखकर निर्णय लेते हैं, और बुकिंग के लिए ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर रहते हैं। ऑनलाइन बुकिंग ने पर्यटकों के लिए यात्रा को अधिक सुलभ, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया है, वहीं स्थानीय व्यवसायों को भी व्यापक स्तर पर ग्राहकों तक पहुँचने का अवसर मिला है। शोध के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि डिजिटल माध्यमों ने झाँसी के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा प्रदान की है। इस अध्ययन से प्राप्त जानकारियाँ नीति निर्माताओं, पर्यटन विभाग और स्थानीय व्यवसायों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं।
बीज शब्द- डिजिटल युग, पर्यटन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बुकिंग, प्रभाव, झाँसी जनपद।
1.1 प्रस्तावना
21वीं सदी को डिजिटल युग कहा जाता है, क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को गहराई से प्रभावित किया है। पर्यटन क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। जहाँ पहले पर्यटक अपनी यात्रा योजनाओं के लिए यात्रा एजेंसियों, परिचितों की सलाह या पुस्तकों पर निर्भर रहते थे, वहीं आज वे फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, ट्रैवल ब्लॉग्स, रिव्यू
साइट्स तथा ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल्स (जैसे MakeMyTrip, Goibibo, IRCTC) के माध्यम से निर्णय लेते हैं। सोशल मीडिया केवल गंतव्य की जानकारी ही नहीं देता, बल्कि अनुभव साझा करने, समीक्षाएँ पढ़ने और यात्रा को अधिक सुविधाजनक व पारदर्शी बनाने में सहायक है। यह प्रभाव भारत के छोटे एवं ऐतिहासिक नगरों जैसे झाँसी में भी तेजी से देखा जा रहा है। झाँसी उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक नगर है, जो रानी लक्ष्मीबाई के वीरत्व, किलों, मंदिरों, सांस्कृतिक धरोहरों और प्राकृतिक स्थलों के कारण प्रसिद्ध है। यहाँ पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं, परंतु डिजिटल साधनों के प्रयोग और सेवाओं का स्तर अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। इसी परिप्रेक्ष्य में इस शोध का उद्देश्य झाँसी जिले में सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग सेवाओं के पर्यटन पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना है। यह अध्ययन न केवल पर्यटकों की सोच और व्यवहार का विश्लेषण करेगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन उद्योग में डिजिटल माध्यमों की उपयोगिता, संभावनाएँ और चुनौतियाँ भी उजागर करेगा।
1.2 शोध की आवश्यकता, महत्व एवं प्रासंगिकता
आधुनिक डिजिटल युग में सूचना एवं संचार तकनीक ने जीवन को सरल और तीव्र बनाया है। विद्यालय स्तर पर विद्यार्थी डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं, जिसका प्रभाव उनके शैक्षिक, सामाजिक और नैतिक जीवन पर पड़ रहा है। विशेषकर झाँसी जैसे नगरों में इसकी भूमिका स्पष्ट दिखती है। यह शोध आवश्यक है क्योंकि इससे विद्यार्थियों के दृष्टिकोण, सामाजिक भागीदारी और उपलब्धियों पर डिजिटल संसाधनों के प्रभाव का पता चलेगा। डिजिटल इंडिया अभियान से छोटे शहरों में भी तकनीक की पहुँच बढ़ी है, इसलिए ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन माध्यमों की उपयोगिता और स्थानीय स्तर पर इसकी प्रभावशीलता जानना महत्त्वपूर्ण है। यह अध्ययन शिक्षकों, नीति-निर्माताओं और समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
1.3 शोध समस्या
‘‘डिजिटल युग में पर्यटनः सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग का प्रभाव’’ (जनपद झाँसी के विशेष सन्दर्भ में)।
1.4 समस्या कथन में आये शब्दों का परिभाषीकरण
डिजिटल युग
डिजिटल युग वह समय है जिसमें संचार, जानकारी और सेवाएँ डिजिटल तकनीकों—जैसे कंप्यूटर, स्मार्टफोन, इंटरनेट और एप्लिकेशन—के माध्यम से संचालित होती हैं। पर्यटन में यह यात्रियों के लिए सूचना, निर्णय और यात्रा योजना को सरल और त्वरित बनाता है।
पर्यटन
पर्यटन का अर्थ है किसी व्यक्ति का अपने निवास स्थान से दूर अस्थायी रूप से भ्रमण करना, जो मनोरंजन, शिक्षा, व्यवसाय, धर्म या संस्कृति के कारण हो। यह सामाजिक-सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक विकास दोनों में सहायक होता है।
सोशल मीडिया
सोशल मीडिया ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं जो उपयोगकर्ताओं को विचार, जानकारी, अनुभव, चित्र और वीडियो साझा करने की सुविधा देते हैं। प्रमुख प्लेटफॉर्म अब पर्यटन क्षेत्र में जानकारी प्राप्त करने, प्रचार-प्रसार और प्रेरणा का प्रभावी माध्यम बन गए हैं।
ऑनलाइन बुकिंग
ऑनलाइन बुकिंग वह प्रक्रिया है जिसमें पर्यटक इंटरनेट के माध्यम से यात्रा, होटल, टिकट, गाइड और वाहन जैसी सुविधाओं की अग्रिम व्यवस्था करते हैं। यह पारंपरिक बुकिंग की तुलना में तेज, सुविधाजनक और पारदर्शी होती है। प्रमुख उदाहरणों में विभिन्न यात्रा पोर्टल्स और मोबाइल एप्लिकेशन शामिल हैं।
प्रभाव
प्रभाव का मतलब किसी कारक द्वारा व्यक्ति, समूह या प्रक्रिया पर पड़े सकारात्मक या नकारात्मक बदलाव से है। इस शोध में इसका आशय यह जानना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग ने पर्यटन व्यवहार, निर्णय प्रक्रिया और युवाओं की सोच को कितनी हद तक प्रभावित किया है।
झाँसी जनपद
झाँसी उत्तर प्रदेश राज्य का एक ऐतिहासिक नगर है जो रानी लक्ष्मीबाई, झाँसी किला, गणेश मंदिर, रानी महल, ओरछा गेट आदि के कारण पर्यटन की दृष्टि से प्रसिद्ध है। यह अध्ययन विशेष रूप से झाँसी जिले के छात्रों एवं पर्यटकों के डिजिटल व्यवहार का विश्लेषण करने पर केंद्रित है।
1.5 शोध उद्देश्य
- स्नातक एवं परास्नातक स्तर के पुरुष और महिला के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव का अध्ययन करना।
- महिला एवं पुरुष के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव का अध्ययन करना।
1.6 परिकल्पना
- स्नातक एवं परास्नातक स्तर के पुरुष और महिला के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव में कोई सार्थक अंतर नहीं है।
- महिला एवं पुरुष के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव में कोई सार्थक अंतर नहीं है।
1.7 शोध परिसीमन
यह शोध विशेष रूप से उत्तर प्रदेश राज्य के झाँसी जिले में स्थित महाविद्यालय स्तर के शिक्षार्थियों तक सीमित है। अध्ययन झाँसी के प्रमुख पर्यटन स्थलों के संदर्भ में सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफार्मों के प्रभाव को समझने पर केंद्रित है। शोध में उपयोग की गई जानकारी झाँसी जिले के पर्यटकों और छात्रों से प्राप्त की गई है तथा इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के प्रभाव का विश्लेषण करना है। अतः इस शोध के निष्कर्ष अन्य भौगोलिक क्षेत्रों पर पूर्णतः लागू नहीं किए जा सकते।
2.1 साहित्य समीक्षा
ठाकुर (2015) के अध्ययन का उद्देश्य सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के विकास के भारतीय परिप्रेक्ष्य का अध्ययन करना था। इस शोध में अवलोकन, प्रश्नावली और साक्षात्कार पद्धतियों का प्रयोग किया गया। परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि सोशल मीडिया पर यात्रा संबंधी अनुभव साझा करने से पर्यटकों के निर्णयों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
शर्मा (2016) ने अपने अध्ययन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के पर्यटन व्यवसाय पर प्रभाव का तुलनात्मक विश्लेषण किया। शोध पद्धति में अवलोकन, ऑनलाइन प्रश्नावली और साक्षात्कार शामिल थे। निष्कर्ष यह रहा कि सोशल मीडिया ने पर्यटन स्थलों की पहचान और लोकप्रियता में वृद्धि की।
ओझा (2018) के अध्ययन में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के पर्यटन निर्णयों और पर्यटक प्राथमिकताओं पर प्रभाव का परीक्षण किया गया। इस अध्ययन में अवलोकन और साक्षात्कार विधियाँ अपनाई गईं। परिणामस्वरूप यह पाया गया कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने पर्यटकों की पसंद और यात्रा निर्णयों को प्रभावित किया।
धनोका (2019) ने सोशल मीडिया समीक्षाओं और टिप्पणियों के पर्यटन निर्णयों पर प्रभाव का विश्लेषण किया। शोध में अवलोकन और ऑनलाइन डेटा का उपयोग किया गया। निष्कर्ष यह रहा कि ऑनलाइन समीक्षाएँ और टिप्पणियाँ पर्यटकों की धारणाओं और निर्णयों को गहराई से प्रभावित करती हैं।
ठाकुर (2021) के अध्ययन में सोशल मीडिया के माध्यम से यात्रा निर्णय प्रक्रिया को समझने पर बल दिया गया। शोध में अवलोकन और साक्षात्कार पद्धतियों का उपयोग हुआ। निष्कर्षों से स्पष्ट हुआ कि सोशल मीडिया से सूचना प्राप्त करने पर यात्रा निर्णय प्रक्रिया सरल हुई।
चैधरी (2023) ने अपने शोध में सोशल मीडिया और यात्रा निर्णयों के बीच संबंध का अध्ययन किया। इस अध्ययन में अवलोकन और ऑनलाइन प्रश्नावली का प्रयोग हुआ। परिणाम दर्शाते हैं कि सोशल मीडिया ने पर्यटकों के निर्णयों पर प्रभावी योगदान दिया।
बड़कले (2024) ने सोशल मीडिया पर यात्रा ब्रांड्स और विज्ञापनों के प्रभाव का अध्ययन किया। इस शोध में अवलोकन और ऑनलाइन प्रश्नावली अपनाई गई। निष्कर्ष निकला कि यात्रा ब्रांड विज्ञापनों ने पर्यटकों के निर्णयों को प्रभावित किया।
ओझेश (2025) के अध्ययन में सोशल मीडिया द्वारा पर्यटन व्यवसाय में ब्रांड निर्माण प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया। शोध पद्धति में अवलोकन और ऑनलाइन प्रश्नावली शामिल थीं। परिणामस्वरूप यह पाया गया कि सोशल मीडिया ने पर्यटन व्यवसाय के ब्रांड निर्माण में सहयोग प्रदान किया।
2.2 साहित्य समीक्षा का सारांश
2015 से 2025 तक हुए शोधों से स्पष्ट होता है कि डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। सोशल मीडिया ने यात्रियों के निर्णय और गंतव्य ज्ञान को प्रभावित किया, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने यात्रा योजनाओं को सरल व सुलभ बनाया। अधिकांश अध्ययनों ने दिखाया कि डिजिटल साधनों ने सेवाओं को वैश्विक स्तर पर पहुँचाकर प्रतिस्पर्धा बढ़ाई, हालाँकि कई शोध केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित रहे। पिछले अध्ययनों में डेटा संग्रह की सीमाएँ और पद्धति की कमी रही, जिसे मेरा शोध ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को शामिल करते हुए प्रश्नावली व साक्षात्कार दोनों विधियों से अधिक व्यापक व विश्वसनीय बनाएगा।
3.1 अनुसंधान पद्धति
इस शोध में मिश्रित पद्धति का उपयोग किया गया है, जिसमें गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों तरीकों को शामिल किया गया। डाटा संकलन के लिए प्रश्नावली का प्रयोग किया गया, जिसमें पहले से तय किए गए सरल और स्पष्ट प्रश्न रखे गए। इसके साथ ही कुछ छात्रों और विशेषज्ञों से बातचीत करके अतिरिक्त जानकारी भी प्राप्त की गई। नमूना चयन के लिए सुविधाजनक विधि अपनाई गई, जिसके अंतर्गत झाँसी जिले के स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के कुल 103 छात्र-छात्राओं को चुना गया। साथ ही पाँच विषय-विशेषज्ञों से भी राय ली गई। इस प्रकार इस पद्धति ने अध्ययन को भरोसेमंद और उपयोगी बनाया।
3.2 प्रयोग किए गए उपकरण/तकनीकें एवं विश्वसनीयता और वैधता
अध्ययन में मुख्य साधन के रूप में प्रश्नावली का उपयोग किया गया। प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण हेतु सांख्यिकीय टी-टेस्ट तकनीक का उपयोग किया गया जिससे दो समूहों के बीच अंतर ज्ञात किया जा सका। प्रश्नावली की विश्वसनीयता व वैधता विशेषज्ञों द्वारा जाँचकर तथा पायलट स्टडी के माध्यम से सुनिश्चित की गई। डेटा संग्रह की संपूर्ण प्रक्रिया मानक अनुसंधान पद्धति के अनुरूप रही।
- आंकड़ों की प्रकृति
अनुमानात्मक शोध अध्ययनों में पैरामीट्रिक सांख्यिकी के उपयोग हेतु यह आवश्यक है कि निष्कर्ष सामान्य रूप से वितरित हों, नमूना आकार पर्याप्त हो और नमूने का चयन उचित ढंग से किया गया हो। इसलिए विश्लेषण से पूर्व इन शर्तों की पूर्ति की जाँच की गई और प्राप्त आंकड़ों का परीक्षण कर उन्हें प्रस्तुत किया गया।

4.2 आंकड़ों का संयोजन व सारणीकरण
शोध हेतु एकत्रित आंकड़ों का विश्लेषण सांख्यिकीय विधियों द्वारा किया गया। तालिकाओं व सारणियों की सहायता से निष्कर्ष स्पष्ट और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किए गए ताकि शोध के उद्देश्य अधिक स्पष्ट हो सकें।
उद्देश्य (O1) – स्नातक एवं परास्नातक स्तर के पुरुष और महिला के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव का अध्ययन करना।
परिकल्पना (H1) – स्नातक एवं परास्नातक स्तर के पुरुष और महिला के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव में कोई सार्थक अंतर नहीं है।
इस परिकल्पना की पुष्टि के लिए स्नातक स्तर के सभी 36 पुरुष और महिला एवं परास्नातक स्तर के सभी 67 पुरुष और महिला पर स्वनिर्मित डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव मापनी को प्रसारित करने के उपरान्त प्राप्त परिणाम निम्नलिखित सारणी में इस प्रकार प्रदर्शित किये गये हैं-
सारिणी सं.- 4.1
| प्रतिदर्श | संख्या | मध्यमान | मानक विचलन | मध्यमानों का अन्तर | मानक त्रुटि | परिगणित क्रान्तिक अनुपात | सार्थकता स्तर पर |
| स्नातक (पुरुष और महिला) | 36 | 32.72 | 8.234 | 0.18 | 1.670 | 0.110 | 0.05 पर 1.98 |
| परास्नातक (पुरुष और महिला) | 67 | 32.53 | 7.799 |
सारणी 4.1 से ज्ञात होता है कि टी-परीक्षण अथवा क्रान्तिक अनुपात का परिगणित मान 0.110 सारणीमान टी 0.05 = 1.98 से कम है। अतः शून्य परिकल्पना स्वीकृत होती है अर्थात् स्नातक एवं परास्नातक स्तर के पुरुष और महिला के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया।
उद्देश्य (O2) – महिला एवं पुरुष के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव का अध्ययन करना।
परिकल्पना (H2) – महिला एवं पुरुष के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव में कोई सार्थक अंतर नहीं है।
इस परिकल्पना की पुष्टि के लिए स्नातक और परास्नातक स्तर की सभी 68 महिला और स्नातक और परास्नातक स्तर के सभी 35 पुरुष पर स्वनिर्मित डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव मापनी को प्रसारित करने के उपरान्त प्राप्त परिणाम निम्नलिखित सारणी में इस प्रकार प्रदर्शित किये गये हैं-
सारिणी सं.- 4.2
| प्रतिदर्श | संख्या | मध्यमान | मानक विचलन | मध्यमानों का अन्तर | मानक त्रुटि | परिगणित क्रान्तिक अनुपात | सार्थकता स्तर पर |
| महिला (स्नातक एवं परास्नातक) | 68 | 32.76 | 7.469 | 0.536 | 1.653 | 0.324 | 0.05 पर 2.01 |
| पुरुष (स्नातक एवं परास्नातक) | 35 | 32.23 | 8.802 |
सारणी 4.2 से ज्ञात होता है कि टी-परीक्षण अथवा क्रान्तिक अनुपात का परिगणित मान 0.324 सारणीमान टी 0.05 = 1.98 से कम है। अतः शून्य परिकल्पना स्वीकृत होती है अर्थात् महिला एवं पुरुष के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया।
- स्नातक एवं परास्नातक स्तर के पुरुष और महिला के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव में कोई सार्थक अंतर नहीं है।
अर्थापन (Interpretation)
स्नातक स्तर के पुरुष और महिला का समष्टिगत माध्य 32.72 तथा मानक विचलन 8.234 पाया गया, जबकि परास्नातक का समष्टिगत माध्य 32.53 तथा मानक विचलन 7.799 प्राप्त हुआ। दोनों स्तरों के समष्टिगत के मध्य माध्य का अंतर 0.184 रहा। परिकलित टी-परीक्षण का मान 0.1107 प्राप्त हुआ, जोकि df (101) पर 0.05 के स्तर पर टी तालिका के मान 1.98 से कम है। इस प्रकार, यह सिद्ध होता है कि स्नातक एवं परास्नातक स्तर (चाहे वे पुरुष हों या महिला) के दृष्टिकोण में डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव को लेकर कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं है। अतः प्रथम परिकल्पना स्वीकार की जाती है।
- महिला एवं पुरुष के मध्य डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव में कोई सार्थक अंतर नहीं है।
अर्थापन (Interpretation)
सभी महिला प्रतिभागियों का संयुक्त माध्य 32.76 तथा मानक विचलन 7.469 रहा, वहीं पुरुष प्रतिभागियों का संयुक्त माध्य 32.22 तथा मानक विचलन 8.802 प्राप्त हुआ। दोनों के बीच माध्य का अंतर 0.536 पाया गया। परिकलित टी-परीक्षण का मान 0.324 प्राप्त हुआ, जोकि df (101) पर 0.05 के स्तर पर टी तालिका के मान 1.98 से कम है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि डिजिटल युग में पर्यटन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग के प्रभाव को लेकर महिला एवं पुरुष के दृष्टिकोण में कोई सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर नहीं है। अतः द्वितीय परिकल्पना स्वीकार की जाती है।
4.3 प्रदत्तों का संकलन व वर्णनात्मक विश्लेषण (विशेषज्ञ साक्षात्कार के आधार पर)
प्रस्तुत शोध में प्रश्न विशेषज्ञों के समक्ष रखे गए। उनके उत्तरों का विश्लेषण कर शोधार्थी ने निष्कर्षों को तटस्थ व उद्देश्यपरक रूप में प्रस्तुत किया।
प्रश्न :- वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने पर्यटन के विकास में कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का मत है कि सोशल मीडिया ने पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा दी है। विशेषज्ञ 1 और 2 के अनुसार इंस्टाग्राम व यूट्यूब पर साझा की गई तस्वीरें और व्लॉग्स लोगों को प्रेरित करते हैं। विशेषज्ञ 3 मानते हैं कि सोशल मीडिया पर्यटकों के निर्णय को सीधे प्रभावित करता है। विशेषज्ञ 4 ने राजस्थान जैसे राज्यों के ग्रामीण स्थलों की लोकप्रियता का उदाहरण दिया, जबकि विशेषज्ञ 5 के अनुसार छोटे गाँव भी वायरल वीडियो के माध्यम से विश्व मानचित्र पर आ चुके हैं। कुल मिलाकर, सोशल मीडिया एक प्रभावशाली प्रचार माध्यम बन चुका है जिसने पर्यटन को वैश्विक विस्तार दिया है।
प्रश्न :- ऑनलाइन बुकिंग सुविधाओं ने पर्यटकों के यात्रा निर्णयों को किस प्रकार प्रभावित किया है।
सभी विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि ऑनलाइन बुकिंग ने यात्रा की योजना को सहज, त्वरित और पारदर्शी बना दिया है। विशेषज्ञ 1 ने कहा कि अब पर्यटक मोबाइल से ही सारी सेवाएं बुक कर सकते हैं। विशेषज्ञ 2 के अनुसार रिव्यू और ऑफर पर्यटकों के निर्णय को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञ 3 का मानना है कि लचीलापन और रियल टाइम जानकारी निर्णय प्रक्रिया को आसान बनाते हैं। विशेषज्ञ 4 ने कहा कि पर्यटक सुविधाओं की जानकारी पहले से देखकर समझदारी से चयन कर पाते हैं। विशेषज्ञ 5 के अनुसार यह सुविधा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है और समय व पैसे की बचत भी होती है।
5.1 शोध अध्ययन का शैक्षिक निहितार्थ
किसी भी शोध का महत्व तभी है जब उसके निष्कर्षों का शैक्षिक प्रभाव स्पष्ट हो। प्रस्तुत शोध के निष्कर्षों से स्पष्ट है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का गहरा शैक्षिक प्रभाव पड़ता है।
नीति निर्माताओं के लिए
डिजिटल प्रोफाइलिंग और ऑनलाइन सूचना की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने हेतु स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वाले खातों पर नियंत्रण के लिए ठोस दिशा-निर्देश तैयार किए जाने आवश्यक हैं। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ बनाया जाए, ताकि सभी को समान अवसर मिल सके। साथ ही, प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और ब्लॉगर्स के साथ समन्वय स्थापित कर उपयोगी जानकारी प्रसारित की जाए। स्थानीय स्तर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोगी नीतियाँ लागू की जानी चाहिए।
शिक्षकों एवं शैक्षिक संस्थानों के लिए
पाठ्यक्रम में सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग जैसे व्यावहारिक विषयों को शामिल किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को डिजिटल उपकरणों, ई-मार्केटिंग और सोशल मीडिया के प्रयोग पर प्रोजेक्ट्स अथवा सेमिनार्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा सकता है। डिजिटल युग से जुड़े नैतिक मूल्यों जैसे जिम्मेदारी और पर्यावरणीय दायित्व पर भी संबेदनशीलता का विकास किया जाना चाहिए। साथ ही, विश्वविद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों को इंडस्ट्रियल टूर और ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाना चाहिए।
अभिभावकों के लिए निहितार्थ
युवाओं को डिजिटल माध्यमों से सही और प्रमाणिक जानकारी प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन देना चाहिए। बच्चों को पठन-पाठन के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समझ को बढ़ाने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। साथ ही, ऑनलाइन बुकिंग में पारदर्शिता और जिम्मेदार प्लेटफॉर्म का चयन करने की आदत भी विकसित कराई जानी चाहिए।
युवाओं एवं युवतियों के लिए निहितार्थ
डिजिटल टूल्स का उपयोग कर नए पर्यटन स्थलों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सोशल मीडिया के माध्यम से यात्रा संस्कृति और अनुभव साझा किए जा सकते हैं। ऑनलाइन बुकिंग द्वारा समय और संसाधनों की बचत संभव है। साथ ही, स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण का सम्मान करते हुए जिम्मेदार पर्यटन अपनाना आवश्यक है।
टूर ऑपरेटर्स व ट्रैवल एजेंट्स के लिए निहितार्थ
डिजिटल रणनीति को विकसित कर ग्राहकों से सीधे जुड़ा जा सकता है। सरल डिजिटल बुकिंग सिस्टम बनाकर उपभोक्ताओं का विश्वास जीता जा सकता है। स्थानीय और सांस्कृतिक आधार पर विशेष पैकेज प्रस्तुत करने से क्षेत्रीय पहचान को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, सोशल मीडिया रिव्यू और रेटिंग के माध्यम से सेवाओं की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है। ईमेल, चैटबॉट और एनालिटिक्स जैसे डिजिटल टूल्स का उपयोग ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने के लिए किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन कार्यशालाओं में पारदर्शिता बनाए रखते हुए उपभोक्ताओं को भरोसेमंद अनुभव प्रदान किया जा सकता है।
कंटेंट क्रिएटर्स व सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए निहितार्थ
पर्यटन स्थलों की सही और जिम्मेदार जानकारी पर्यटकों तक पहुँचाना आवश्यक है। प्रमोशन केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण से न होकर सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर भी केंद्रित होना चाहिए। स्थायी पर्यटन और स्थानीय सहयोग को आधार बनाकर सामग्री तैयार करनी चाहिए, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिले। इसके साथ ही, अपशिष्ट और नकारात्मक प्रभावों से बचाव के उपाय किए जाएँ। स्थानीय भाषा और परंपराओं को महत्व देकर पर्यटकों को जोड़ने की कोशिश की जाए, ताकि पर्यटन अधिक संवेदनशील, सुरक्षित और टिकाऊ बन सके।
होटल उद्योग व हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए निहितार्थ
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाओं की उपस्थिति बढ़ाना आज के पर्यटन क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकता है। ऑनलाइन बुकिंग में पारदर्शिता और भरोसेमंद व्यवस्था अपनाकर पर्यटकों को सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। इसके लिए डिजिटल गाइड, लोकेशन मैप और पैकेज उपलब्ध कराए जाएँ, जिससे पर्यटक आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें। होटल स्टाफ को डिजिटल सेवाओं के उपयोग में प्रशिक्षित करना आवश्यक है ताकि वे आधुनिक तकनीक का सही उपयोग कर सकें। साथ ही, पर्यावरण-हितैषी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए और पर्यटकों को ऑप्शनल टूर, डिस्काउंट कूपन और लॉयल्टी प्रोग्राम के माध्यम से आकर्षित किया जाए। इससे न केवल पर्यटन की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि सतत विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ आधार मिलेगा।
स्थानीय स्वयंसेवी संगठन व संबंधित संस्थाओं के लिए निहितार्थ
फिजिकल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा सकता है और उन्हें पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर प्रदान किए जा सकते हैं। सोशल मीडिया पर सक्रियता अभियान चलाकर पर्यटन स्थलों के महत्व और आकर्षण को प्रचारित किया जाए। पर्यटन से प्रभावित क्षेत्रों पर नियमित अध्ययन कर सुझाव देना आवश्यक है, ताकि वहाँ की सुविधाएँ बेहतर बनाई जा सकें। स्थानीय कला, संस्कृति और उत्पादों का डिजिटल प्रमोशन किया जाए जिससे ग्रामीण और छोटे कारीगरों को भी लाभ मिले। छोटे पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल स्टोरीटेलिंग अपनाई जाए और उनकी पहचान को नए स्तर तक पहुँचाया जाए। साथ ही, ऑनलाइन समुदाय बनाकर पर्यटन और समाज के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना चाहिए।
5.2 भावी शोध हेतु सुझाव
- सोशल मीडिया आधारित सामग्री का पर्यटन स्थलों की छवि पर प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है।
- विभिन्न ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म्स की विश्वसनीयता व उपभोक्ता संतुष्टि पर शोध किया जा सकता है।
- ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के पर्यटकों द्वारा सोशल मीडिया उपयोग के अंतर का विश्लेषण किया जा सकता है।
- डिजिटल पर्यटन के कारण पर्यावरणीय प्रभावों (जैसे भीड़, प्रदूषण) पर अध्ययन किया जा सकता है।
- सोशल मीडिया समीक्षाओं का पर्यटकों के निर्णय-निर्माण पर प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है।
सन्दर्भ ग्रन्थ सूची-
- भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय. (2022). राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन मिशन। नई दिल्लीः भारत सरकार. दस्तावेज प्राप्त: https://tourism.gov.in/sites/default/files/2022&09/National%20Digital%20Tourism%20Mission_2022.pdf
- ठाकुर, ए. (2015). सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का भारतीय परिप्रेक्ष्य में विकास. शैक्षिक शोध, 12(3), 45-52.
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