संत साहित्य : एक सामाजिक विकृतियों के विरोध की सार्थकता

डॉ. महक
सहायक प्रोफेसर (हिंदी विभाग)
चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय
भिवानी (हरियाणा) भारत

Abstract

संत साहित्य हमारे देश की अमूल्य निधि है l संतो ने समाज को दिशा देने का काम हर काल एवं हर परिस्थिति में किया है संत साहित्य  मानव को  विपरीत परिस्थितियों में भी  लड़ने   एवं माननीय धर्म अपनाने तथा  उस पर अडिग रहने का संदेश देता है l  कबीर,सूरदास , तुलसीदास  दादू  दयाल  जैसे अनेक संतो ने  मानव को मानव धर्म अपनाने के साथ-साथ राष्ट्र के उत्थान के लिए एवं  स्वयं के  उत्थान लिए भी ईश्वर के साथ एकाकार करने का  आह्वान किया  ,जहां  कबीरदास  ने विभिन्न प्रकार  की सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया,  वहीं तुलसीदास ने   रामचरितमानस एवं विभिन्न कृतियों के माध्यम से समाज में आदर्श समाज के निर्माण एवं कल्याणकारी कार्य करने के साथ _साथ  केवल राम के स्मरण  पर  बल दिया l मीराबाई ने जहां समाज के सम्मुख अपने प्रबल भक्ति का  उदाहरण रखा, वही गुरुनानक देव जी ने धर्म को सबसे ऊपर रखते हुए विभिन्न यात्राओ के द्वारा विभिन्न सामाजिक कुरीतियों एवं बाह्य  आडंबर का विरोध करते हुए मनुष्य को समरसता का संदेश दिया l

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