डीग जिले में पर्यटन संसाधनों का भौगोलिक मूल्यांकन एवं वर्गीकरण : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

राजाराम
सहायक आचार्य (भूगोल)
महारानी श्री जया राजकीय स्नातकोतर महाविद्यालय (भरतपुर)
एवं
शोधार्थी खुशाल दास  विश्वविद्यालय
हनुमानगढ़

Abstract

राजस्थान के पूर्वी सिंहद्वार के रूप में विख्यात डीग जिला अपनी भू-सांस्कृतिक विविधता के लिए पहचाना जाता है। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से ‘यमुना के जलोढ़ मैदान’ और विश्व की प्राचीनतम ‘अरावली पर्वतमाला’ का एक विशिष्ट संक्रमण क्षेत्र है, जो इसे पर्यटन की दृष्टि से बहुआयामी बनाता है। प्रस्तुत शोध पत्र का मूल उद्देश्य नवगठित डीग जिले में बिखरे हुए पर्यटन संसाधनों का एक वैज्ञानिक सूचीकरण (इन्वेंटरी) तैयार करना और उनका भौगोलिक वर्गीकरण करना है। इस गुणात्मक अध्ययन में प्राथमिक क्षेत्रीय सर्वेक्षण, अवलोकन विधि और द्वितीयक स्रोतों, विशेषकर पुरातत्व सर्वेक्षण प्रतिवेदनों का गहन विश्लेषण किया गया है। शोध के निष्कर्ष यह उद्घाटित करते हैं कि डीग के पर्यटन आकर्षण केवल जल महलों तक सीमित नहीं हैं, अपितु यहाँ 7 विशिष्ट श्रेणियों के संसाधन विद्यमान हैं— जिनमें पुरातात्विक, ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, पारिस्थितिकीय, भू-पर्यटन और शैक्षिक संसाधन शामिल हैं। अध्ययन से ज्ञात होता है कि डीग की ‘जल अभियांत्रिकी’ (वाटर इंजीनियरिंग) और ‘ब्रज 84 कोस परिक्रमा’ इसे वैश्विक मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, कामां और पहाड़ी क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक संरचनाएं  शोध पर्यटन के लिए नवीन संभावनाएं प्रस्तुत करती हैं। यह शोध पत्र नीति निर्माताओं को संसाधनों की स्थानिक विविधता को समझने और तदनुसार विशिष्ट विपणन रणनीतियां विकसित करने में आधार प्रदान करेगा।

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