सावित्रीबाई फुले से महात्मा गांधी तक : सतत् विकास हेतु लैंगिक समानता में योगदान का विश्लेषण

सुश्री रेखा कुमारी
शोधार्थी
कला, शिक्षा व सामाजिक विज्ञान संकाय
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर (राज)
अतिथि सहायक आचार्य
अर्थशास्त्र विभाग
राजकीय महाविद्यालय पिड़ावा झालावाड (राज)

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र में देश के महान्  राष्ट्रनिर्माताओं के योगदान के अंतर्गत महान् समाजसुधारको  सावित्रीबाई फुले, सहित ज्योतिबा फुले, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी इत्यादि के लैंगिक समानता में योगदान के विभिन्न आयामों का सतत् विकास हेतु विस्तार से विश्लेषण कर ध्यान केन्द्रित किया गया हैं। तथा इनके द्वारा किए गए प्रयासों व योगदान से प्रेरणा लेकर आने वाले समय में हमारे देश के सतत् विकास व सर्वांगीण विकास हेतु वर्तमान समय में प्रासंगिकता का तुलनात्मक अध्ययन कर सकेंगे और साथ ही  लैंगिक समानता का अर्थ यह नहीं कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति एक लिंग का हो, अपितु लैंगिक समानता का सीधा सा अर्थ समाज में महिला तथा पुरुष के समान अधिकार, दायित्व और रोजगार के अवसरों के प्ररिप्रेक्ष्य में हैं। जिस प्रकार तराजू में दोनों तरफ बराबर भार रखने पर वह संतुलित होता हैं। ठीक उसी तरह से किसी भी समाज व राष्ट्र में संतुलन बनाने के लिए जरूरी हैं कि वहां पुरुषों तथा स्त्रियों के मध्य लैंगिक समानता स्थापित की जानी चाहिए। आज महिलाएं विज्ञान, राजनीति, व्यापार और खेल जैसे क्षेत्रों में पुरुषों के बराबर अपनी प्रतिमा का परचम लहरा रही हैं | आज जरूरत है, हर व्यक्ति को यह समझने की कि लैंगिक समानता केवल महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि समाज की उन्नति और देश के विकास का मार्ग हैं । ताकि हमारे देश का ‘ एक विकसित भारत, एक श्रेष्ठ भारत, एक नव भारत का सपना मूर्त रूप ले सकें। तथा साथ ही हमारे देश का सतत्, निरन्तर एवं सर्वागीण विकास संभव हो सकें।

error: Content is protected !!
Scroll to Top