| कैलाश चन्द यादव सहायक आचार्य (राजनीति विज्ञान) राजकीय महाविद्यालय अटरू एवं शोधार्थी राजकीय महाविद्यालय, बूंदी कोटा विश्वविद्यालय, कोटा |
शोध सारांश
यह शोध पत्र मुख्यतः भारतीय संघवाद के सैद्धान्तिक व व्यावहारिक विश्लेषण पर केन्द्रित है। शोध पत्र में संघवाद के आधारभूत सिद्धान्तों के परिप्रेक्ष्य में भारतीय संघवाद के विश्लेषण का प्रयास किया गया है। साथ ही इसके बदलते स्वरुप की व्याख्या की गई है। भारत में संघवाद केन्द्रीकृत संघवाद से लेकर सहकारी संघवाद तक के सफर के रूप में उभरा है। पिछले चार दशकों में (लगभग 90 का दशक प्रारम्भ होने से पहले तक) भारतीय संघवाद में जबरदस्त केन्द्रीकरण की प्रवृत्ति देखी गई। ये बात सही है कि भारतीय संविधान आपातकाल में संघ को अत्यधिक शक्तिशाली बना देता है किन्तु सामान्य स्थिति में ऐसी कोई बात नहीं कहता है। आरम्भिक वर्षों में केन्द्र सरकार ने ऐसे कई तरीकों का प्रयोग किया जिससे राज्यों के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण हुआ। संघवाद का स्वरूप बदलता जा रहा है जिसका कारण बदलती परिस्थिति है। संघवाद के बदलते स्वरूप का आध्ययन वर्तमान परिप्रेक्ष्य के लिहाज से उपयुक्त प्रतीत होता है।
