| डॉ. अनिल कुमार सिन्हा प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (भूगोल) राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर (छत्तीसगढ) | डॉ. राजीब जाना अतिथि व्याख्याता (भूगोल विभाग) राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर (छत्तीसगढ) |
Abstract
सतत् विकास वह विकास है जो भावी पीढ़ियों को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की योग्यता के साथ समझौता किए बिना ही वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करें। यह विकास की वह रणनीति है जो सभी प्राकृतिक, मानवीय, वित्तीय तथा भौतिक संसाधनों का संपत्ति तथा आर्थिक कल्याण में दीर्घकालिक वृद्धि करने के लिए प्रबंध करती है। भारत में स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पिछले कुछ सालों में सतत कृषि विकास की दिशा में गंभीर प्रयास किए गए हैं परिणामस्वरूप देश में जैविक और प्राकृतिक खेती का रकबा निरंतर बढ़ रहा है।इसके लिए जैविक खेती की कृषि पद्धतियों को अपनाना होगा जो कि हमारे नैसर्गिंक संसाधनों एवं मानवीय पर्यावरण को प्रदूषित किये बगैर समस्त जनमानस को खाद्य सामग्री उपलब्ध करा सकेगी तथा हमें खुशहाल जीने की राह दिखा सकेगी।
