| डॉ. घनश्याम सैनी सहायक आचार्य (समाजशास्त्र) श्री कल्याण राजकीय कन्या महाविद्यालय सीकर |
Abstract
भारतीय ज्ञान प्रणाली अपने स्वदेशी ज्ञान के साथ सम्पूर्ण जीवन का तरीका प्रस्तुत करती है। यह शोध पत्र भारतीय समाज में सम्पूर्ण विकास को बढ़ावा देने में भारतीय ज्ञान प्रणाली के महत्व का अवलोकन करता है। प्राचीन भारतीय दर्शन से प्राप्त भारतीय ज्ञान एक विशाल रूपरेखा प्रदान करता है जो मानव विकास के बौद्धिक, शारीरिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं को समन्वित करता है।
यह पत्र पता लगाता है कि प्राचीन भारतीय दार्शनिक विचार, आयुर्वेद, योग, वैदिक गणित जैसे प्रमुख तथ्यों को सीखने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर कैसे आधुनिक शैक्षिक प्रणालियों में शामिल किया जा सकता है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली आत्म जागृति, नैतिक निर्णय लेने और भावनात्मक कल्याण जैसे मूल्यों पर जोर देकर शिक्षा के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदान करती है जो वर्तमान में तनाव, पर्यावरणीय स्थिरता और नैतिक नेतृत्व जैसी समकालीन चुनौतियों का समाधान करती है।
इस शोध पत्र में न केवल अकादमिक उत्कृष्टता बल्कि व्यक्तियों के सम्पूर्ण कल्याण को पोषित करने के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों की क्षमता पर प्रकाश डाला गया है। जो सीखने का ऐसा परिदृश्य निर्मित करती है जिसमें छात्रों को सांस्कृतिक विरासत से गहरे जुड़ाव के साथ-साथ वैश्विक नागरिकता के लिए तैयार किया जाता है। अनेक शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को अपनाने से समाज के लिए अधिक टिकाऊ और सम्पूर्ण शैक्षिक सुधार लाए जा सकते हैं। यह शोध पत्र भारतीय ज्ञान प्रणाली के सिद्धांतों और आधुनिक शिक्षा के लिए इसकी प्रासंगिकता का पता लगाने का प्रयास करता है। यह छात्रों के बौद्धिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को बढ़ाकर कैसे सम्पूर्ण विकास को बढ़ाता है।
