| ज्योति पाण्डेय शोधार्थी (वाणिज्य विभाग) शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय रीवा (म.प्र.) | डॉ. विद्युत प्रकाश मिश्र प्राध्यापक (वाणिज्य) राजभान सिंह स्मारक महाविद्यालय मनिकवार, रीवा (म.प्र.) |
Abstract
ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के आर्थिक विकास पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा। जिससे उनका पूरा परिवार प्रभावित हुआ। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, भुखमरी जैसी स्थितियाँ कोविड-19 के दौरान देखने को मिली। इससे अर्थव्यवस्था पर प्रकोप के प्रभाव विशेष रूप से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में विनाशकारी स्वरूप में रहा है। आटोमोबाइल क्षेत्र में कार्य करने वाले श्रमिकों की आय नुकसान ने कुछ अव्यक्त आर्थिक अपर्याप्तताओं को उजागर किया है। इससे कई लोग और व्यवसाय महामारी के दौरान ढप्प हो गया। इस अवधि की आर्थिक तबाही को अवशोषित करने के लिए ऑटोमोबाइल कम्पनी के मालिकों ने तो कम्पनी के कार्य कर रहे मजदूरां को तो ध्यान दिया। किन्तु जो श्रमिका स्वयं के आटोपार्टस की दुकाने कर रहे थें। उनकी दशा दिनों-दिन खराब होती गई। आंकड़ों पर आधारित आकलनों के अनुसार, उदाहरण के लिए, उभरते और उन्नत देशों में कुल परिवारों में अधिक, आर्थिक क्षति के मामले देखे गये। जो बुनियादी व्यय जारी रखने में सक्षम नहीं रहें। इस प्रकार से सामान्य कंपनी की वित्तीय परिसंपत्तियां केवल 55 दिनों से कम के खर्च को बनाए रख सकती थी। इस समस्याओं को बेहद संकट पन्न रही है। इससे वित्तीय संकट से पहले, उभरते देशों में बड़ी संख्या में लोग और व्यवसाय पहले से ही असहनीय उधार लागतों से जूझ रहे थे, और कई लोगों को संकट के बाद भुगतान करने में अत्यधिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। आय और आर्थिक कारोबार में तेजी से कमी आई। आपदा से दुनिया भर में असमानता और भूख बहुत प्रभावित हुई थी।
Keywords: वित्तीय संकट, महामारी, श्रमिक, संगठन, वैश्विक, गरीबी, प्रकोप, भुखमरी एवं ऑटोमोबाईल आदि।
शोध प्रविधि-
इस शोध पत्र विषय शीषर्क कोविड-19 के दौरान ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों पर आर्थिक प्रभाव: एक अध्ययन में प्राथमिक एवं द्वितीयक शोध सामाग्री के आधार पर अध्ययन किया गया है। इस शोध पत्र में पत्र-पत्रिकाओं, अर्थशास्त्रीय सिद्धान्तों के साथ-साथ व्यावसायिक संगणकों को भी समाहित किया गया है। इसके साथ अन्य ग्रन्थों और विद्वानों का भी मार्गदर्शन प्राप्त किया गया है।
उद्देश्य-
- श्रमिकों को कोविड़-19 से जागरूकता का अध्ययन करना।
- कोविड़-19 में ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में सक्रियता का अध्ययन करना।
- ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में कार्य कर रहें श्रमिकों की आर्थिक समस्याओं का अध्ययन करना।
- कोविड़-19 के माध्यम से श्रमिकों के आर्थिक मजबूती का अध्ययन करना।
- कोविड़-19 के दौर में श्रमिकों के आर्थिक विकास की समस्याओं का अध्ययन करना।
- ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में कार्य कर रहे श्रमिकों को आर्थिक विसंगतियों के निदान का अध्ययन करना।
समस्या-
- ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में कार्य करे श्रमिकों को हाथ धोने के लिए पानी और साबुन की उपयोगिता की कमी रही है।
- श्रमिकों को आर्थिक दवाव के कारण सेनेटाइजर और अन्य सामाग्री की बड़ी समस्या रही है।
- दूसरी बड़ी समस्या रही है कि आटोमोबाईल के क्षेत्र कार्य कर रहें श्रमिक जो अपनी आजीविका के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन करने लगे।
- कोविड़-19 के दौरान समाज में श्रमिका का जीवन बड़ी संकटापन्न स्थिति से जूझ रहा था। इसके लिए कोविड़-19 के वायरस के जन सामुदायिक प्रसार के प्रति संवेदनशील रहा है।
- औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों को आर्थिक मदद नहीं मिली।
- लॉकडाउन में छूट के परिणाम स्वरूप हजारों-लाखों प्रवासी कामगार कम्पनियों को छोड़कर घर लौटने की सस्याओं तक को झेला गया।
शोध की विश्वसनीयता और वैधता को रेखांकित करना-
भारतीय अर्थव्यवस्था का कोरोना वायरस का आटोमोबाइल के क्षेत्र में प्रभाव का अध्ययन शोध की विश्वसनीयता को रेखांकि करने में है कि अलग-अलग समय पर व्यक्तियों के समूहों या एक ही व्यक्ति पर मापन के श्रमिकों के आर्थिक विकास के प्रभाव के परिणाम प्रदान करता है। ग्रीन, टुल और अल्बम, 1988। विश्वसनीयता के मुद्दे विशेष रूप से उस स्थिति में महत्वपूर्ण हैं। जहां शोध का बहुत कम अनुभव मानव को मिलता है। जिससे आटोमोबाइल के क्षेत्र में कार्य कर रहें श्रमिकों में पड़ता है।
साहित्य समीक्षा-
- राणा एण्ड केरामत (2021), ए सिस्टेमेटिक लिट्रेचर रिव्यु ऑफ द इम्पैक्ट ऑफ कोविड़-19 लॉकडाउन ऑन एयर क्वॉलिटी इन चाईना के प्रस्तुत अध्ययन में पाया महामारी के प्रकोप ने विश्व स्तर पर एक लाख से अधिक लोगों की जान ले ली है।
- राना आर. और केरामत एस., 2021, ए सिस्टेमेटिक लिट्रेचर रिव्यु ऑफ द इम्पैक्ट ऑफ कोविड़-19 लॉकडाउन ऑन एयर क्वॉलिटी इन चाईना, एयरोसोल एण्ड एयर क्वॉलिट रिसर्च, ताईवान, प्रभाव की जाँच करने वाले हाल के अध्ययनों का एक मात्रात्मक और कथात्मक संश्लेषण प्रदान करने का प्रयास किया।
- चतुर्वेदी आर., विश्वकर्मा एस., सिंह वी. (2021) इम्पैक्ट ऑफ कोविड ऑन सोशियल लाईफ एण्ड मेन्टल हैल्थ इन इंडिया में शिक्षा, सामाजिक विकास के उत्थान के लिए आटोमोबाईल के क्षेत्र में कार्य कर रहे श्रमिकों को भी इलाज के लिए पहुँचाने या चिकित्सा केन्द्रों तक पहुँचने के लिए अतिआवश्यक जरूरत थी।
समाधान-
आटोमोबाइल के क्षेत्र में कार्य कर रहें श्रमिकों को दशकों में पहली बार, गरीबी वैश्विक आधार पर बढ़ी, और हाशिए पर पड़े समूहों को संसाधनों के असमान नुकसान का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप देशों के भीतर और देशों में असमानता में तेज वृद्धि हुई। युवा लोगों, महिलाओं, स्व-नियोजित लोगों और कम माध्यमिक योग्यता वाले अनुबंध श्रमिकों को भी अधिक आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। चूंकि उनके उन उद्योगों में काम करने की अधिक संभावनाएँ रही है। जो उसी समय की स्थिमि में बंद और सामाजिक दूरी के प्रयासों से अधिक प्रभशील रहा है। इसलिए आय और नौकरी में कमी से महिलाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुईं। आटोमोबाइल उद्योग सामान्य रुझान के साथ अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस महामारी के दौरान होने वाली घाटे को छोटे संगठनों, अनौपचारिक व्यवसायों और संस्थागत ऋण तक कम पहुंच वाले संगठनों द्वारा अधिक महत्वपूर्ण रूप से महसूस किया गया है। वित्तीय संकट के दौरान, बड़ी कंपनियां मध्यम आकार की कंपनियों के लिए श्रमिकों को बहुत ही कम ध्यान दिया। इसके अतिरिक्त, सूक्ष्म, छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों को उद्योग की मंदी से सबसे अधिक प्रभावित होने में दृढ़ता से प्रतिनिधित्व करने में अधिक कठिनाईयाँ देखी गई है। आटोमोबाईल के क्षेत्र में तत्काल अवधि में प्रकोप के लिए सरकारी प्रतिक्रियाएं अविश्वसनीय रूप से त्वरित और व्यापक रूप से कार्य कर रही थी। इससे अधिकारियों द्वारा विभिन्न नीतियों को सभी को बचाने के लिए कारगर उपाय अपनाया गया। यहाँ तक की ऑटोमोबाईल कम्पनी के मालिकों ने भी अपने श्रमिकों को समय-समय पर पैसे देकर उनकी जीवकोंपार्जन के संसाधनों को जुटाने में अहंम भूमिका निभाई है। इससे स्पष्ट है कि ऑटोमोबाईल कम्पनियां ने भी अपने श्रमिकों को आर्थिक उन्नति के लिए अर्थव्यवस्थाओं में इस स्तर पर पहले कभी लागू नहीं की गई थीं। बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष सामाजिक अनुदान कार्यक्रम, ऋण अधिस्थगन और केंद्रीय बैंक की निवेश पहल आदि भी इसके उदाहरण है।
इस आपदा से ऑटोमोबाईल कम्पनी ने निकलने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया। पुनः श्रमिकों को आर्थिक उपलब्धता के आधार पर विकास के मौलिक स्तरों पर डालने का अथक प्रयास किया है। इस प्रकार से उनकी सीमित क्षमता और सार्वजनिक उपयोग की जाने वाले ऋण की पर्याप्ता का विशेष ध्यान दिया है। इस वजह से, सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात के रूप में मंदी के लिए बजटीय प्रतिक्रिया उच्च आय वाले देशों में लगभग हमेशा पर्याप्त थी, जबकि विकसित देशों में लगातार नगण्य या अनुपस्थित थी। अविकसित देशों में बजटीय प्रतिक्रियाएं काफी भिन्न दिखाई देती है।
ऑटोमोबाईल कम्पनी ने व्यवसायों और अन्य वाणिज्यिक उद्यमों को फिर से शुरूआत करने का कार्य किया है। इसके परिणामस्वरूप, बेरोजगारी की दर में बहुत ही अधिक गिरावट देखा गया है। यहाँ तक कोविड़-19 के स्तर पर आर्थिक गिरावट का अत्यधिक सामना करना पड़ रहा था। ऑटोमोबाईल कम्पनी ने लॉकडाउन कितने लंबे समय तक चला, उनका आर्थिक प्रभाव बहुत कम हो गया था। इस प्रकार से व्यवसायों को देर से भुगतान करने की अनुमति भी नहीं थी। इस प्रकार से कमजोर परिवारों को धन और आवश्यकताएँ देकर उनकी मदद करने की योजनाओं को भी प्रारम्भ किया गया है। इस प्रकार से छोटे किसानों और उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन कार्यक्रम के आधार पर कार्य करने की विशिष्टताओं की ओर रेखांकित किया गया है।
तालिका क्रमांक-1
कोविड-19 के दौरान आटोमोबाइल क्षेत्र में कार्य कर रहें श्रमिकों पर आर्थिक प्रभाव का अध्ययन
| क्र | आटोमोबाइल कम्पनी | आर्थिक प्रभाव हाँ (%) | आर्थिक प्रभाव नहीं (%) |
| 1 | आटो पार्टस में कार्य कर रहे श्रमिक | 95 | 10 |
| 2 | आटोपार्टस के दुकानदार | 70 | 30 |
| 3 | आटोपार्टस में कार्य करने वाले मिस्त्री | 92 | 08 |
Sources-व्यक्तिगत साक्षात्कार के माध्यम से
तालिका क्रमांक-1 में कोविड-19 के दौरान आटोमोबाइल कम्पनी में कार्य कर रहें श्रमिकों में आर्थिक प्रभाव हाँ में 95% लोगों मे पड़ा। जबकि आर्थिक प्रभाव नहीं में 10% प्रतिशत श्रमिकों में नहीं पड़ा। आटोपार्टस के दुकानदारों में 70% प्रतिशत को आर्थिक प्रभाव पड़ा। जबकि 30% दुकानदारों को आर्थिक प्रभाव नहीं पड़ा। इससे आटोपार्टस में कार्य करने वाले मिस्त्री में 92% प्रतिशत लोगों प्रभावित हुए जबकि 08% मिस्त्री नहीं प्रभावित हुए।
चार्ट क्रमांक-1

निष्कर्ष-
ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में आर्थिक विकास को मजबूत करने का कार्य किया गया है। इस प्रकार नई सामग्रियों का पता लगाना और भविष्य में ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में अधिक से अधिक कुशल संरचनात्मक कार्यों को महत्व प्रदान किया गया है। इस प्रकार से ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों को सख्ती से विकसित किया गया। ऑटोमोबाइल के लिए हल्के सामग्रियों और हल्के वाहनों की खोज करना भी शामिल है।
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- आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22
