| Ankita Agarwal Research Scholar (Geography) R.R. Morarka Govt. College Jhunjhunu (Rajasthan) | Prof. Maan Singh Department of Geography R.R. Morarka Govt. College Jhunjhunu (Rajasthan) |
Abstract
यह अध्ययन 1991 से 2011 के बीच जयपुर महानगर में नगरीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप भूमि उपयोग के बदलते स्वरूप का विश्लेषण करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि शहरी विस्तार ने निर्मित क्षेत्र, कृषि भूमि, हरित क्षेत्र तथा अन्य भू-उपयोग श्रेणियों को किस प्रकार प्रभावित किया। इसके लिए भू-स्थानिक तकनीकों, दूरसंवेदी आँकड़ों तथा मानचित्रण पद्धतियों का उपयोग किया गया है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि इस अवधि में जयपुर में निर्मित क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जबकि कृषि भूमि और रिक्त भूभाग में निरंतर कमी आई। शहरी फैलाव मुख्यतः प्रमुख मार्गों तथा उप-नगरीय क्षेत्रों की ओर बढ़ा, जिससे प्राकृतिक संसाधनों, जल निकायों और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। अध्ययन यह भी इंगित करता है कि औद्योगिक विकास, निजी निवेश, परिवहन सुविधाओं का विस्तार तथा ग्रामीण-से-शहरी पलायन इस परिवर्तन के प्रमुख कारक रहे। निष्कर्षतः, जयपुर जैसे तीव्र गति से विकसित हो रहे महानगरों में संतुलित, पर्यावरण-संवेदनशील और दूरदर्शी शहरी नियोजन की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
