वैश्विक परिदृश्य के साहित्यिक जगत में जनसंचार की भूमिका

प्रो. इसाबेला लकड़ा
प्राध्यापक (हिन्दी)
शासकीय माता शबरी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय
बिलासपुर (छ.ग.)
प्रो. हीरालाल शर्मा
निदेशक
पं. सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय
बिलासपुर (छ.ग.)

Abstract

वैश्विक परिदृश्य में जनसंचार माध्यमों से सम्पूर्ण दुनिया के लगभग सभी विकसित और विकासशील देशों में पढ़ा जाता है। यह कार्य इतनी पूर्णता और तीव्रता से किया जाता है कि एक सदीं पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। एक समाचार पत्र का कार्य केवल समाचारों को शीघ्रता से छापकर लोगों तक पहुँचाना ही नहीं था। बल्कि इसके अतिरिक्त, दैनिक समाचार पत्र की भूमिका उस समाज के बदलते स्वरूप का यथार्थ चित्रण को विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। इसलिए आज हम किसी भी आधुनिक समाज या शहर की कल्पना समाचार पत्रों के बिना नहीं कर सकते। समाचार पत्र किसी समुदाय का निर्माण नहीं करते, लेकिन वे निश्चित रूप से उसे परिभाषित करने और उसकी एकता बनाए रखने में मदद करते हैं। वे सामान्य हितों या व्यवहारों को बढ़ावा देते हैं, विशेषकर उन समाजों में जहाँ एक ही समाचार पत्र व्यापक रूप से पढ़ा जाता है। इसी प्रकार, एक स्थानीय समाचार पत्र किसी नगर या जिले की पहचान और अपनत्व की भावना को बनाए रखने में सहायता करता है। यह लोगों को राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों में भाग लेने में भी मदद करता है। जनसंचार एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा संगठित गतिविधि के माध्यम से तथ्यों, सूचनाओं, विचारों, विकल्पों और निर्णयों का आदान-प्रदान दो या अधिक पेशेवर इकाइयों के बीच होता है।

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