| Deepika Rani (Research Scholar) Department of Education Tantia University Sri Ganganagar (Rajasthan) | Preeti Sharma (Vice Principal) Department of Education Ch. Parma Ram Godara T.T. College Bhadra, Hanumangarh (Rajasthan) |
Abstract
यह शोध-पत्र गोगाजी और गोगामेड़ी के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य गोगाजी की आस्था, उनके द्वारा स्थापित लोकपरंपराओं और गोगामेड़ी में आयोजित सांस्कृतिक गतिविधियों के सामाजिक प्रभाव को समझना है। अनुसंधान में वर्णनात्मक एवं सर्वे आधारित पद्धति अपनाई गई, जिसमें प्राथमिक डाटा प्रश्नावली, अर्द्ध-संरचित साक्षात्कार और प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से संकलित किया गया, जबकि द्वितीयक डाटा पुस्तकों, शोध-पत्रों और सांस्कृतिक अभिलेखों से एकत्रित किया गया। तुलनात्मक विश्लेषण के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों, युवा और बुजुर्ग पीढ़ियों तथा विभिन्न धार्मिक समुदायों के दृष्टिकोणों की समीक्षा की गई। शोध के निष्कर्ष यह प्रदर्शित करते हैं कि गोगाजी की परंपरा ग्रामीण समाज में आस्था, नैतिक मूल्यों और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करती है। साथ ही, गोगा नवमी मेला और अन्य सांस्कृतिक अनुष्ठान स्थानीय संस्कृति और सामुदायिक सहयोग की निरंतरता को बनाए रखते हैं। यह अध्ययन यह भी उजागर करता है कि गोगाजी की हिंदू-मुस्लिम साझा परंपरा सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देती है। कुल मिलाकर, प्रस्तुत शोध भारतीय लोकसंस्कृति, सामाजिक चेतना और सांप्रदायिक सद्भाव के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण अकादमिक एवं व्यावहारिक योगदान प्रदान करता है।
