| Om Prakash Assistant professor (VSY) Govt. College, Sojat Pali (Rajasthan) |
Abstract
किसी भी समुदाय के लिए भूमि एक प्राथमिक संसाधन है जो सीमित है। अतः उस भूमि के अधिकतम एवं बेहतर उपयोग तथा उस पर नियन्त्रण के लिए नियोजन महत्वपूर्ण है, ताकि समुदाय के लिए उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग हो सके। आर्थिक गतिविधियों एवं भू-उपयोग का सामंजस्य वैज्ञानिक तरीके से करने के लिए नियोजन प्रक्रिया की आवश्यकता है। भौतिक नियोजन या नगर एवं प्रादेशिक नियोजन एक ऐसी पद्धति है, जो कि किसी भी नगर के भावी आकार, स्वरूप, प्रतिरूप, विकास की दिशा आदि के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय करने का कार्य करता है, और इन निर्णयों के क्रियान्वयन हेतु समुचित तन्त्र की रचना करती है। एक बार यदि प्रत्येक नगर के संबंध में ऐसे वृहद् निर्णय लिये जाते हैं तो दिन प्रतिदिन के मामलों पर उचित समाधान हेतु इस संपूर्ण ढांचे के सन्दर्भ में विचार कर ऐसे प्रत्येक हल का क्रियान्वयन, नगर को अपने अंतिम उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाता है क्योंकि इस प्रकार की व्यवस्था के अन्तर्गत पृथक से न तो कोई निर्णय लिया जा सकता है और न ही किसी कार्यक्रम को एकाकी रूप से क्रियान्वित किया जा सकता है।
Keywords: भूमि, नियोजन, संसाधन, पेयजल, जनाकिकीय ,विकास आवासीय ।
प्रस्तावना
भूमि सभी प्राकर्तिक संसाधनों में एक आधारभूत संसाधन है। मनुष्य अपनी आवशयकता की पूर्ति के लिए भूमि का उपयोग करता है भारत जेसे कृषि प्रधान देश के लिए तो यह ओर भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योकि इस देश की अधिकांश जनसंख्या इसी संसाधन पर संसाधन पर निर्भर है निरंतर जनसंख्या वृद्धि के साथ ही मानव अपने लाभ के लिए भूमिका उचित या अनुचित तरीके से अधिकतम उपयोग करने लगा है जिस भूमि की उर्वरा शक्ति का हास तथा कम होने लगी है ।इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों के भूमि उपयोग प्रतिरूप को देखकर उमेश संसाधन का भाविक विकास हेतु समुचित ढंग से नियोजित किया जाना आवश्यक है। गतिशील भूमि उपयोग का प्रतिरूप (Dynamic Land Use Pattern)
समय और स्थान के साथ भूमि के उपयोग (जैसे कृषि, आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और वन) में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है। यह मुख्य रूप से तीव्र जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक विकास, और तकनीकी प्रगति से प्रेरित होता है।
आंकड़ों के स्रोत एवं विधि तंत्र- द्वितीयक आकड़ों के आधार पर भूमि उपयोग का विश्लेषण किया गया है-
- भूमि उपयोग संबंधी आंकड़े वाली तहसील कार्यालय ।
- जलवायु संबंधी आंकड़े भारतीय मौसम विज्ञान विभाग कार्यालय ।
- जनसंख्या सम्बंधित आंकड़े जनगणना निदेशालय एवं जिला सांख्यिकी रूपरेखा।
- तहसील के नगर की भूमि नगर पालिका।
अध्ययन के उद्देश-
- बाली नगर की भूमि उपयोग प्रतिरूप का विशलेषण करना ।
- बाली नगर की भूमि उपयोग का सिद्धान्तो व् नियमो के अनुरूप विकसित होने की संभावना का अध्ययन करना।
- बाली नगर की 2031 की भावी विकास की विस्तार योजना का अध्ययन करना ।
आवशयकता एव महत्त्व
नगरीयकरण योग्य क्षेत्र बाली नगर की जनसंख्या वर्ष 2001 में 18201 थी, जिसकी तुलना में वर्ष 2031 तक यहाँ की जनसंख्या बढ़कर लगभग 35000 होने का अनुमान है अर्थात् नियोजन अवधि में इस नगर की जनसंख्या लगभग दुगनी होने की सम्भावना है। इस तरह यहां लगभग 17000 व्यक्तियों की बढ़ोतरी होगी। इन बढ़े हुए व्यक्तियों के लिए आवासीय उपयोग व कार्य स्थलों और अन्य सामुदायिक उपयोग हेतु भूमि की आवश्यकता रहेगी। बाली नगर के नगरीयकरण क्षेत्र की संभावित सीमाओं का निर्धारण करते समय वर्तमान भौतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक उपयोग हेतु भूमि की आवश्यकता का अनुपातिक आंकलन किया गया है। यह सुनिश्श्चत किया गया है कि अनुमानित 35000 व्यक्तियों को नियोजित तरीके से बसाने और इसके अनुरूप समुचित अनुपात में कार्य केन्द्रों व सामुदायिक केन्द्रों का प्रावधान करते हुए उपर्युक्त एवं सुविधाजनक परिसंचर व्यवस्था के नेटवर्क से जोडने हेतु विभिन्न भू-उपयोगों के लिए लगभग 1490 एकड़ (596 हेक्टेयर) भूमि की आवश्यकता रहेगी।
क्षितिज वर्ष 2031 में यहां की जनसंख्या लगभग 35,000 व्यक्ति हो जाने का अनुमान इस प्रकार यहां लगभग 12000 अतिरिक्त व्यक्तियों हेतु अतिरिक्त भूमि की आवश्यकत रहेगी। यहां के नागरिकों को स्वस्थ वातावरण देने व बढ़ती हुई जनसंख्या को पर्याप्त मूलभूत व जनोपयोगी सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए नगर का यह (प्रारूप) मास्टर प्लान तैयार किया गया। आधार वर्ष 2010 में कुल विकसित क्षेत्र 545 एकड़ (218 हेक्टेयर) है। वर्ष 2031 की अनुमानित जनसंख्या 35000 व्यक्तियों हेतु 1438 एकड़ (575.2 हेक्टेयर) विकास योग्य क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है जो कुल अधिसूचित नगरीय क्षेत्र 26985 एकड (10794 हेक्टेयर) का 5.33 प्रतिशत है। नगर को 4 योजना क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। यह मास्टर प्लान न केवल नगर के भावी विकास को दिशा निर्देश प्रदान करेगा बल्कि नगर में
जलवायु व भौगोलिक दशा
बाली नगर पाली जिला मुख्यालय के दक्षिण दिशा में 25°11′ उत्तरी अक्षांश तथा 73°17′ पूर्वी देशान्तर पर स्थित है। बाली नगर पालिका का क्षेत्रफल 49.30 वर्ग किमी. (12325 एकड़), (4987.87 हेक्टेयर) है। यहां की भूमि अधिकांशतः समतल है। नगर की अधिकांश पुरानी आबादी व किला तथा सरकारी कार्यालय मीठड़ी नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। मीठडी नदी दक्षिणी-पूर्वी दिशा से उत्तरी-पश्चिमी दिशा की तरफ बहती है। इसका सामान्यतः ढ़लान पूर्व से पश्चिम में है। मीठड़ी नदी अधिकतर सूखी रहती है लेकिन अधिक वर्षा होने पर इस नदी में बाढ़ भी आती है। वर्ष 2006 में इस नदी में बाढ़ आयी थी। बाली की सामान्यतः जलवायु शुष्क एवं गर्म है एवं यहां की औसत वर्षा 627.5 मिमी. है। गर्मी के दिनों में यहां का उच्च तापमान 44 डिग्री सेन्टीग्रेड रहता है तथा सर्दी के दिनों में यहां का उच्च तापमान 25 से 30 डिग्री सेन्टीग्रेड एवं न्यूनतम 2.7 डिग्री सेन्टीग्रेड के लगभग रहता है। नगर से 25 किमी. की दूरी पर दक्षिण पूर्व की ओर अरावली की पहाड़ियां स्थित होने से यहां का जलवायु प्रदेश के शुष्क भागों की अपेक्षा अनुकूल रहता है। पाली जिले (राजस्थान) का भूमि उपयोग (Land Use Pattern) पाली जिला राजस्थान के अरावली क्षेत्र में स्थित है। इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 12,387 वर्ग किमी (लगभग 12.39 लाख हेक्टेयर) है। यह अर्ध-शुष्क जलवायु वाला क्षेत्र है, जहाँ कृषि मुख्य आर्थिक गतिविधि है, लेकिन वर्षा अनियमित होने के कारण फालो लैंड और बंजर भूमि का हिस्सा भी महत्वपूर्ण है।
भूमि उपयोग (हेक्टेयर में): 2017-18
| S.no. | श्रेणी (Category | क्षेत्रफल (हेक्टेयर) | प्रतिशत (लगभग, जिले के रिपोर्टिंग एरिया के सापेक्ष) |
| 1 | वन क्षेत्र (Forest) | 86,797 | ~7% |
| 2 | गैर-कृषि उपयोग (Non-Agricultural Uses) | 59,426 | ~5% |
| 3 | बंजर एवं अनुपजाऊ भूमि (Barren & Unculturable) | 1,38,772 | ~11% |
| 4 | स्थायी चरागाह एवं अन्य चराई भूमि (Permanent Pastures & Grazing) | 1,98,198 | ~16% |
| 5 | वृक्षारोपण/बाग (Misc. Tree Crops & Groves) | 360 | 0.00 |
| 6 | कृषि योग्य बंजर भूमि (Culturable Waste) | 1,33,063 | ~11% |
| 7 | (Other Fallows land) | 1,01,506 | ~8% |
| 8 | Current Fallows land | 59,830 | ~5% |
| 9 | शुद्ध बोया गया क्षेत्र (Net Sown Area) | 6,53,685 | ~53% |
| 10 | कुल बोया गया क्षेत्र (Gross Sown Area) | 8,39,773 | – |
| 11 | एक से अधिक बार बोया गया | 1,86,088 | – |
स्रोत: राजस्थान कृषि सांख्यिकी एवं संबंधित अध्ययन (2017-18)।
प्रमुख विशेषताएँ:कृषि भूमि जिले का सबसे बड़ा हिस्सा है। शुद्ध बोया गया क्षेत्र (Net Sown Area) लगभग 53% है, जो राज्य औसत से अच्छा है। अरावली पहाड़ियों के कारण वन क्षेत्र और चरागाह भूमि का हिस्सा उल्लेखनीय है। सिंचाई: मुख्य रूप से कुओं पर निर्भर। जिले में जवाई बांध और सरदार समंद बांध जैसे जल स्रोत हैं, लेकिन कुल सिंचित क्षेत्र सीमित है। परिवर्तन: समय के साथ शुद्ध बोया गया क्षेत्र बढ़ा है, जबकि कृषि योग्य बंजर और फालो भूमि में कुछ कमी आई है। शहरीकरण और औद्योगिक विकास (विशेषकर पाली शहर में) से गैर-कृषि उपयोग बढ़ रहा है।
अध्ययन क्षेत्र का क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य
बाली, पाली जिले का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपखण्ड व तहसील मुख्यालय है। पाली जिले के क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में बाली की अहम भूमिका है। पाली जिला उत्तरी पश्चिम में जोधपुर, उत्तरी दिशा में नागौर उत्तर-पूर्वी दिशा में अजमेर, दक्षिण-पूर्वी दिशा में राजसमंद तथा उदयपुर तथा दक्षिण-पश्चिमी दिशा में जालोर एवं सिरोही जिलों से जुड़ा हुआ है। पाली जिला 24° 45′ से 26°29′ उत्तरी अक्षांश तथा 72°47′ से 74°18′ पूर्वी देशान्तर के बीच में स्थित है। यह मुख्यतः कृषि प्रधान क्षेत्र है तथा यहां की प्रमुख फसले बाजरा, गेहू, ज्वार, चना एवं जौ आदि है। बाली से 28 किमी. दक्षिण-पूर्वी दिशा में देश का प्रसिद्ध रणकपुर जैन मन्दिर स्थित है जो अरावली पहाड़ियों की तलहटी पर बसा हुआ है जहां देश भर से श्रृद्धालू दर्शनार्थ आते हैं। दर्शनार्थी फालना रेलवे स्टेशन से रेल द्वारा आने के बाद बाली होकर सड़क द्वारा रणकपुर जैन मन्दिर जाते हैं। इस नगर में रेलवे लाइन स्थित नहीं है लेकिन इसके उत्तर-पश्चिमी दिशा में 6 किमी. दूरी पर फालना रेलवे स्टेशन बड़ी रेल लाइन पर स्थित है जो देश के मुख्य नगरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।
ऐतिहासिक
बाली एक प्राचीन नगर है जिसकी स्थापना 1240 ई. में शरू बाली बलदेव राजा के द्वारा बाली की भूमि को युद्ध में जीत कर अपने क्षेत्र की राजधानी घोषित की थी। राजा ने अपने नाम पर ही इस नगर का नाम बाली रखा। पौराणिक कथा में यह वर्णित है कि पांचों पांडव बाल्यावस्था में यहा क्रीडा किया करते थे और उस समय भीम ने यहाँ पर कुएं का निर्माण किया था सन 1608 में महाराजा बाला सिंह ने ,इस नागर में एक किले का निर्माण किया और अगेर को दुशमनो के आक्रमणों से बचने के लिये किले के चारो ओर उची दीवार का निर्माण करवाया
जनांकिकी
बाली नगर की जनसंख्या मध्यम गति से बढ़ रही है। वर्ष 1981 में यहाँ की जनसख्या 14162 थी जो वर्ष 2001 में बढ़कर लगभग 18201 हो गयी। अनुमानतः वर्तमान (2010) में यहां की जनसंख्या लगभग 23000 के लगभग है। गत दशक में यहाँ की जनसख्या वृद्धि दर 17.8 प्रतिशत रही है। धीमी जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण यहाँ उद्योगों एवं थोक व्यापार की कमी है जिसके कारण यहां आर्थिक विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। बाली नगर की जनसंख्या 1981 की जनगणना के अनुसार 14162 थी, तथा वर्ष 2001 में यह बढ़कर 18201 हो गयी। वर्ष 1981 से 2001 तक की जनसंख्या में लगभग डेढ़ गुना वृद्धि हुई है नगर के अन्य नगरों से सड़क साधन उपलब्ध होने के कारण यह सम्भावना है कि यहां की जनसंख्या वर्ष 2031 तक लगभग 35000 होने का अनुमान है। जनसंख्या का अनुमान चार विधियों से परिकलित किया गया है। चूंकि यह नगर एक प्रशासनिक, व्यावसायिक एवं पर्यटक केन्द्र के रूप में विकसित होगा, अतः यहां की जनसंख्या 2031 तक 35000 आंकी गयी है। इस प्रकार वर्ष 2001 से 2031 तक की अवधि में नगर की जनसंख्या लगभग दो गुना होने का अनुमान है। जनसंख्या का आंकलन करते समय यहां की अर्थव्यवस्था की भावी संभावना को दृष्टिगत रखा गया है।
निम्न वर्णित तालिका में बाली नगर की जनसंख्या वृद्धि दर को दर्शाया गया है-
तालिका नंबर 1.
जनसंख्या वृद्धि दर बाली 1901 -2011
| वर्ष | जनसंख्या | वृद्धि दर | वृद्धि दर % |
| 1901 | 5186 | – | – |
| 1911 | 5593 | +407 | +7.9 |
| 1921 | 4882 | -304 | -12.7 |
| 1931 | 5779 | +897 | +18.4 |
| 1941 | 7044 | +1265 | +21.9 |
| 1951 | 8599 | +1555 | +22.1 |
| 1961 | 9855 | +1256 | +14.6 |
| 1971 | 11821 | +1966 | +20.0 |
| 1981 | 14162 | +2341 | +20.0 |
| 1991 | 15446 | +1284 | +9.1 |
| 2001 | 18201 | +2755 | +17.8 |
| 2011 |
Source : censes hand book ,pali
व्यावसायिक संरचना
वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार बाली नगर की कार्यशील जनसख्या 5657 (31.1 प्रतिशत) थी जो अन्य नगरों की अपेक्षाकृत कम थी। व्यावसायिक संरचना के अध्ययन से प्रतीत होता है कि वर्ष 2001 में 45.7 प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या अन्य सेवा में कार्यरत थी। खुदरा व्यापार एवं वाणिज्यिक गतिविधियों में 15 प्रतिशत कार्यशील जनसख्या कार्यरत थी। औद्योगिक दृष्टि से इस नगर में औद्योगिक इकाईयां विकसित नहीं हुई हैं, अतः इस व्यवसाय में 6.5 प्रतिशत कामगार कर्यरत थे। यहाँ अधिकांश घरेलू उद्योग कार्यरत हैं।
विद्यमान भू-उपयोग
वर्तमान में बाली नगर पालिका का कुल क्षेत्रफल 49.3 वर्ग किमी. अर्थात 12325 एकड़ (4989.87 हेक्टेयर) है। वर्ष 2010 में नगर का कुल नगरीयकृत क्षेत्र 545 एकड़ (220.64 हेक्टेयर) है जो कुल नगर पालिका क्षेत्र का 4.42 प्रतिशत है। नगरीयकृत क्षेत्र में विकसित क्षेत्र 454 एकड़ (183.80 हेक्टेयर) है। शेष खुली एवं कृषि भूमि तथा नाले-तालाब इत्यादि के अंतर्गत आती है। नगर के वर्तमान विकसित क्षेत्र का घनत्व 50 व्यक्ति प्रति एकड़ है। नगर में कुल विकसित क्षेत्र की 45.3 प्रतिशत भूमि आवासीय उपयोग के अन्तर्गत काम में ली जा रही है तथा शेष भूमि अन्य भू-उपयोग के अन्तर्गत आती है। वर्तमान में कुल 454 एकड़ विकसित क्षेत्र में से 205 एकड़ (83 हेक्टेयर) भूमि आवासीय प्रयोजनार्थ काम में ली जा रही है। आवासीय के पश्चात परिसंचरण के अन्तर्गत 118 एकड़ (47.77 हेक्टेयर) भूमि, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक उपयोग के अन्तर्गत कुल 54 एकड़ (21.86 हेक्टेयर) भूमि आती है। औद्योगिक उपयोग के अन्तर्गत केवल 0.5 एकड़ भूमि आती है। वाणिज्यिक उपयोग हेतु 19 एकड़ (7.69 हेक्टेयर) भूमि आती है जो विकसित क्षेत्र का 4.1 प्रतिशत है। राजकीय एवं अर्द्ध राजकीय कार्यालयों के अन्तर्गत 16 एकड़ (6.47 हेक्टेयर) भूमि आती है जो विकसित क्षेत्र की 3.4 प्रतिशत है। यह नगर प्रशासनिक दृष्टि से सुदृढ़ होने से यहां पर अनेक सरकारी कार्यालय स्थापित हैं। याणिज्यिक गतिविधियां मुख्यतः बाली सादडी सड़क पर संचालित हो रही है। इस प्रादेशिक राजमार्ग पर मिश्रित भू-उपयोग है। मुख्य सडक पर सरकारी कार्यालय खुदरा दुकानें, चिकित्सालय, मन्दिर, बैंक आदि भी निर्मित हैं. तथा इसी मार्ग पर बसों एवं ट्रकों का ठहराव तथा इनकी मरम्मत आदि का कार्य होता है। बस अड्डा व यात्री विश्राम गृह भी इसी मुख्य सड़क पर स्थित है। पुराना नगर राज्य राजमार्ग 16 के दक्षिण की तरफ बसा हुआ है जहां पर सड़कें काफी संकठी है।
आवासीय
वर्ष 1991 की जनगणना के अनुसार नगर की कुल जनसंख्या 15446 थी जो वर्ष 2001 में बढ़कर 18201 हो गई तथा वर्ष 2010 में लगभग 23000 होने का अनुमान हैं। नगर में वर्ष 1991 में कुल परिवारों की संख्या लगभग 2791 थी जो अन्य नगरों की तुलना में कम है। इसका प्रमुख कारण नगर के कई भागों में कुछ क्षेत्र खुली भूमि के रूप में स्थित हैं। वर्ष 2010 में आवासीय उपयोग के अन्तर्गत 205 एकड़ (83 हेक्टेयर) भूमि आती है, जो विकसित क्षेत्र का 45.3 प्रतिशत तथा नगरीयकृत क्षेत्र का 37.61 प्रतिशत है। वर्ष 2010 में आवासीय घनत्व लगभग 50 व्यक्ति प्रति एकड़ है। नगर में बसावट काफी सघन है तथा खुले स्थलों का अभाव है। बाली नगर की पुरानी आबादी में अधिकांशतः पक्के मकान बने हुए हैं जो एक से दो मंजिल तक के हैं। इस नगर में कुछ नई आवासीय बस्तियां विकसित हुई है जो मुख्यतः बाली-सादड़ी सड़क के पूर्व की तरफ स्थित है।
कच्ची बस्तियाँ
बाली नगर में आवासन मंडल द्वारा रड़ावा, ढण्ड की ढाणी, तथा अम्बेड़कर कालोनी में कच्ची बस्तियो में पक्के मकान का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है तथा इसके अलावा पीपनाड़ी भी एक अधिसूचित कच्ची बरती है। इस प्रकार बाली नगर पालिका क्षेत्र में 4 अधिसूचित कच्ची बस्तियों है।
प्रस्तावित योजना क्षेत्र की भू-उपयोग योजना
बाली नगर के नगरीय क्षेत्र को चार योजना परिक्षेत्रों में विभक्त किया गया है। ऐसा निर्णय करते समय विकास के वर्तमान प्रतिरूप, प्राकृतिक एवं मानव निर्मित मास्टर प्लान में क्षितिज वर्ष 2031 के लिए विभिन्न भौतिक, सामाजिक तथा आर्थिक सर्वेक्षणों द्वारा एकत्रित सूचनाओं, वर्तमान विकास की प्रवृति, भौतिक अवरोध, जनसंख्या वृद्धि दर, व्यावसायिक संरचना, परिसंचरण व्यवस्था तथा भूमि की उपलब्धता को मद्देनजर रखते हुए नगर के भावी विकास की रूपरेखा तैयार की गई है जिसे प्रस्तावित भू-उपयोग योजना मानचित्र के रूप में रूपान्तरित किया गया है। बाली नगर के मास्टर प्लान का उद्देश्य नगर को सन्तुलित, एकीकृत एवं सुनियोजित विकास की दिशा प्रदान करना है। इस प्रकार भू-उपयोग योजना विशिष्ट क्रिया-कलापों के चयन और उनके चरणबद्ध विकास का एक दस्तावेज हैं।
प्रस्तावित भू-उपयोग योजना में विभिन्न नगरीय भू-उपयोगों हेतु उपयुक्त जन घनत्व के मानदण्ड़ों का आंकलन कर क्षितिज वर्ष 2031 में कुल आवश्यक क्षेत्रफल प्रस्तावित किया गया है। क्षितिज वर्ष 2031 के लिए विभिन्न भू-उपयोगो हेंतु कुल 1512 एकड (612.14 हेक्टेयर) भूमि नगरीयकरण योग्य क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित की गई है। विकास योग्य क्षेत्र 1460 एकड़ (591.09 हेक्टेयर) प्रस्तावित किया गया है। उक्त भू-उपयोग वर्ष 2031 तक प्रस्तावित विकास योग्य क्षेत्र में से 50.80 प्रतिशत आवासीय, 5.1 प्रतिशत वाणिज्यिक, 2.9 प्रतिशत औद्योगिक, 2.2 प्रतिशत राजकीय एवं अर्द्ध-राजकीय कार्यालय, 9.7 प्रतिशत सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, 9.4 प्रतिशत आमोद-प्रमोद तथा 19.88 प्रतिशत परिसंचरण उपयोग के अन्तर्गत भूमि प्रस्तावित हैं।
नियोजन के भावी विकास योजना के सिद्धान्त
उपरोक्त वर्णित नियोजन नितियों की पालना हेतु नियोजन के निम्नलिखित सिद्धान्त निश्चित किये गये है-
- बाली नगर प्रशासनिक महत्व बनाये रखेगा।
- नगर के पर्यटन महत्व को बढ़ाने की दृष्टि से आवश्यक पर्यटन सुविधायें जैसे-होटल, धर्मशालाएं, पार्किंग सुविधा, आदि का प्रावधान करने की आवश्यकता है।
- बाली नगर दक्षिणी राजस्थान का एक व्यावसायिक केन्द्र के रूप में भी विकसित होगा।
- यहां व्यवसायिक, शैक्षणिक, चिकित्सा आदि की सुविधाओं का आंकलन करते समय स्थानीय जनसख्या के साथ-साथ 5 से 7 किलोमीटर क्षेत्र को परिधि में स्थित गांवों की मूलभूत आवश्यकताओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
- नगर में धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन के महत्व को देखते हुए प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषित उद्योगों की स्थापना की स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए। औद्योगिक क्षेत्र के नजदीक ही औद्योगिक श्रमिकों के लिये आवासीय बस्ती विकसित की जानी चाहिए ताकि कच्ची बस्तियाँ विकसित न हो सके तथा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होने से रोका जा सके।
- यह नगर राज्य राजमार्ग 16 तथा रणकपुर-उदयपुर मार्ग पर स्थित होने से प्रमुख यातायात बसें व भारी वाहन नगर से होकर गुजरते हैं। इस कारण नगर के लिए एक बाईपास सड़क का निर्माण किया जाना चाहिए जो बाली नगर के दक्षिण-पूर्व की तरफ प्रस्तावित होना चाहिए।
- आवासीय घनत्व एवं स्वीकृत योजना मानदण्डों की पद्धति के अनुरूप सम्पूर्ण नगरीय क्षेत्र में सामुदायिक सुविधायें एवं अन्य सेवाओं हेतु पर्याप्त भूमि आरक्षित की जानी चाहिए।
- वर्तमान में स्थित संकडे रास्तों एवं सड़कों को यथा संभव चौडा करने के साथ साथ पार्किंग व्यवस्था की भी आवश्यकता है।
- नगर में स्थित नदी व नालों को पर्यावरण की दृष्टि से सुधार किया जाना चाहिए व इनके किनारों पर वृक्षारोपण करना चाहिए जिससे किनारों पर कटाव
उपसंहार
मास्टर प्लान भावी विकास की तस्वीर मात्र ही है, जिसकी सफलता तभी प्राप्त की जा सकती है, जबकि इसमें प्रस्तावित कार्यक्रमों को कार्य रूप में परिणित किया जाये। इस योजना में आगामी वर्षों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ठोस कार्यक्रम भी सम्मिलित होते हैं। बाली का मास्टर प्लान तैयार करते समय एक विवेक सम्मत एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण को आधार बनाया गया है तथा सामान्य स्तर की सुविधाओं और सेवाओं का पर्याप्त प्रावधान रखा गया है। नगर में नई सुविधाएं विकसित कर, सार्वजनिक सुविधाओं में अभिवृद्धि कर और बाली को आवास की दृष्टि से स्वास्थ्यवर्धक बनाने की स्पष्ट आकांक्षाओं से प्रेरित होकर ही इस योजना को तैयार किया गया है।
References, Notes and Bibliography:
- झा, बी.एन.(1980): भूमि उपयोग की समस्याएँ, कोसी क्षेत्र का एक केस स्टडी, क्लासिकल नई दिल्ली।
- जैनेंद्र कुमार (1986): भूमि उपयोग विश्लेषण, इंटर इंडिया पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली।
- कलवार, एस.सी. (2008): बंजर भूमि और विकास के लिए योजना, कॉन्सेप्ट पब्लिशिंग कंपनी, नई दिल्ली।
- तिवाडी, बी.एन. सिंह : कृषि भूगोल, प्रयाग पुस्तक सदन, इलाहाबाद
- एस. एट अल, 1976, सूक्ष्म स्तरीय योजना – करनाल क्षेत्र, हरियाणा – भारत का एक अध्ययन, के. प्रकाशन, नई दिल्ली।
- शेंग, टी. सी., 1970, जलसंभर प्रबंधन क्षेत्र नियमावली – जलसंभर सर्वेक्षण और योजना, एफएसी संरक्षण गाइड 13/6, संयुक्त राष्ट्र का खाद्य और कृषि संगठन, रोम।
- सिंह, यू. 1955: ‘सारनाथ, बनारस के पास भूमि उपयोग का एक नमूना अध्ययन’, नेशनल ज्योग्राफिक जर्नल ऑफ इंडिया, खंड 1, भाग -1,
- व्यास, आर. एन. (1989) एट अल. 1989: “भारत में फसल उत्पादन के पैटर्न, दक्षता और वृद्धि: 1960 से 1978-81” उदयपुर, राजस्थान में आयोजित आरजीए के 25वें सम्मेलन में प्रस्तुत पत्र।
- बाली नगर (पाली शहर ) की नगर नियोजन रिपोर्ट २०१५
