| Dr. Kumari Pamila Asst. Prof. (Political Science) A.S. College, Deoghar Jharkhand |
Abstract
भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लंबे समय से सीमित रही है, जबकि वे जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा हैं। महिला आरक्षण बिल इस असमानता को दूर करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह शोध-पत्र महिला आरक्षण बिल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति (दशा) और भविष्य की संभावनाओं (दिशा) का विश्लेषण करता है। अध्ययन में यह पाया गया कि पंचायत स्तर पर आरक्षण ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई है, लेकिन संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व अभी भी कम है। हाल ही में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, किंतु इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। यह शोध-पत्र नीति-निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और लैंगिक समानता के संदर्भ में इस बिल की भूमिका का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
