| डॉ. लोभान वर्मा |
Abstract
आज का समाज भले ही आधुनिकता का चोला ओढ़ चुका है लेकिन सत्य यही है कि स्त्री की दुनिया आज भी समाज में नेपथ्य में खड़ी है। मीराकांत ने अपने नाटक के माध्यम से समाज में फैली व्यवस्था का यथार्थ वर्णन किया है जिसमें नेपथ्य राग नाटक में एक विलक्षण प्रतिभा विदुषी खना और वर्तमान की कामकाजी महिला मेधा के माध्यम से स्त्री की प्रतिभा को पुरुष सत्तात्मक व्यवस्था द्वारा कुचल दिया जाता है। कंधे पर बैठा था शाप नाटक में अभिषप्त नारी जीवन तथा पुरुष का अहंभाव तथा अन्त हाजिर हो नाटक में मानव मूल्य का विघटन किस प्रकार समाज में हावी हो चुका है। आज वर्तमान में मानवीय मूल्य, मर्यादा, संस्कृति नष्ट होती जा रही है।
