Author name: Kamaljeet Singh

वैश्विक परिदृश्य के साहित्यिक जगत में जनसंचार की भूमिका

प्रो. इसाबेला लकड़ाप्राध्यापक (हिन्दी)शासकीय माता शबरी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालयबिलासपुर (छ.ग.) प्रो. हीरालाल शर्मानिदेशकपं. सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालयबिलासपुर (छ.ग.) Abstract वैश्विक परिदृश्य में जनसंचार माध्यमों से सम्पूर्ण दुनिया के लगभग सभी विकसित और विकासशील देशों में पढ़ा जाता है। यह कार्य इतनी पूर्णता और तीव्रता से किया जाता है कि एक सदीं पहले इसकी कल्पना भी […]

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वैश्विक परिदृश्य के साहित्यिक जगत में जनसंचार की भूमिका

प्रो. इसाबेला लकड़ाप्राध्यापक (हिन्दी)शासकीय माता शबरी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालयबिलासपुर (छ.ग.) प्रो. हीरालाल शर्मानिदेशकपं. सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालयबिलासपुर (छ.ग.) Abstract वैश्विक परिदृश्य में जनसंचार माध्यमों से सम्पूर्ण दुनिया के लगभग सभी विकसित और विकासशील देशों में पढ़ा जाता है। यह कार्य इतनी पूर्णता और तीव्रता से किया जाता है कि एक सदीं पहले इसकी कल्पना भी

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नगरीकरण से भूमि उपयोग के बदलते स्वरूप का अध्ययनः जयपुर महानगर के संदर्भ में (1991-2011)

Ankita AgarwalResearch Scholar (Geography)R.R. Morarka Govt. CollegeJhunjhunu (Rajasthan) Prof. Maan SinghDepartment of GeographyR.R. Morarka Govt. CollegeJhunjhunu (Rajasthan) Abstract यह अध्ययन 1991 से 2011 के बीच जयपुर महानगर में नगरीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप भूमि उपयोग के बदलते स्वरूप का विश्लेषण करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि शहरी विस्तार ने निर्मित क्षेत्र, कृषि

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Ankita AgarwalResearch Scholar (Geography)R.R. Morarka Govt. CollegeJhunjhunu (Rajasthan) Prof. Maan SinghDepartment of GeographyR.R. Morarka Govt. CollegeJhunjhunu (Rajasthan) Abstract यह अध्ययन 1991 से 2011 के बीच जयपुर महानगर में नगरीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप भूमि उपयोग के बदलते स्वरूप का विश्लेषण करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि शहरी विस्तार ने निर्मित क्षेत्र, कृषि

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जनजातीय लोकगीतों में प्रकृति चित्रण

डॉ. रामजय नाईकसहायक प्राध्यापक (नागपुरी भाषा विभाग)जगन्नाथ नगर महाविद्यालय, धुर्वाराँची (झारखण्ड) Abstract प्रकृति, जो सदियों से हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे समाज, हमारे अस्तित्व को रेखांकित करता है। हमारे जंगल, नदियाँ, महासागर और मिट्टी हमें वह भोजन प्रदान करते हैं जो हम खाते हैं, जिस हवा में हम सांस लेते हैं, जिस पानी से हम अपनी फसलों

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जनजातीय लोकगीतों में प्रकृति चित्रण

डॉ. रामजय नाईकसहायक प्राध्यापक (नागपुरी भाषा विभाग)जगन्नाथ नगर महाविद्यालय, धुर्वाराँची (झारखण्ड) Abstract प्रकृति, जो सदियों से हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे समाज, हमारे अस्तित्व को रेखांकित करता है। हमारे जंगल, नदियाँ, महासागर और मिट्टी हमें वह भोजन प्रदान करते हैं जो हम खाते हैं, जिस हवा में हम सांस लेते हैं, जिस पानी से हम अपनी फसलों

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महिला आरक्षण बिल की दशा एवं दिशा: एक समकालीन विश्लेषण

Dr. Kumari PamilaAsst. Prof. (Political Science)A.S. College, DeogharJharkhand Abstract भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लंबे समय से सीमित रही है, जबकि वे जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा हैं। महिला आरक्षण बिल इस असमानता को दूर करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह शोध-पत्र महिला आरक्षण बिल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति (दशा) और

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Dr. Kumari PamilaAsst. Prof. (Political Science)A.S. College, DeogharJharkhand Abstract भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लंबे समय से सीमित रही है, जबकि वे जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा हैं। महिला आरक्षण बिल इस असमानता को दूर करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह शोध-पत्र महिला आरक्षण बिल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति (दशा) और

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विभिन्न विषयों में आधारित नागपुरी गीत

डॉ. रामजय नाईकसहायक प्राध्यापक (नागपुरी भाषा विभाग)जगन्नाथ नगर महाविद्यालय, धुर्वाराँची (झारखण्ड) Abstract गीत, मानव के जीवन में अह्म भूमिका निभाती है। यह लोगों के जीवन में मनोरंजन के साथ-साथ खुशी, उमंग,उल्लास, रीति-रिवाज एवं सुख-दुःख में साथ देने वाला एक गेय रचना है। इसे लोग अपने दैनिक जीवन में कई तरह से प्रयोग में लाते हैं।

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विभिन्न विषयों में आधारित नागपुरी गीत

डॉ. रामजय नाईकसहायक प्राध्यापक (नागपुरी भाषा विभाग)जगन्नाथ नगर महाविद्यालय, धुर्वाराँची (झारखण्ड) Abstract गीत, मानव के जीवन में अह्म भूमिका निभाती है। यह लोगों के जीवन में मनोरंजन के साथ-साथ खुशी, उमंग,उल्लास, रीति-रिवाज एवं सुख-दुःख में साथ देने वाला एक गेय रचना है। इसे लोग अपने दैनिक जीवन में कई तरह से प्रयोग में लाते हैं।

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