कबीरदास की वर्तमान प्रासंगिकता: आधुनिक भारतीय समाज में सामाजिक दर्शन का विश्लेषण
धर्मराज नायक(सहायक आचार्य) हिंदी साहित्यकेशव महाविद्यालयअटरू, बारां (राजस्थान) Abstract कबीरदास (1398-1518) भक्तिकाल के प्रमुख निर्गुण संत कवि थे, जिनकी वाणी ने मध्यकालीन भारत की सामाजिक-धार्मिक विसंगतियों पर प्रहार किया। आज के भारत में जातिवाद, सांप्रदायिकता, अंधविश्वास और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ विद्यमान हैं, जहाँ कबीर की साखियाँ और पद नैतिक पुनरुत्थान के लिए प्रासंगिक हैं। यह […]
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